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आयुर्वेद ग्राम कुसुमकसा में पूर्व जनपद सदस्य संजय  बैस एवं बैस परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन अपने पूज्य पिता जी  स्व. जयपाल बैस के प्रथम पुण्यतिथि में किया जा रहा है।

भास्कर न्यूज़ 24/ वीरेंद्र भारद्वाज/ दल्लीराजहरा। आयुर्वेद ग्राम कुसुमकसा में पूर्व जनपद सदस्य संजय  बैस एवं बैस परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन अपने पूज्य पिता जी  स्व. जयपाल बैस के प्रथम पुण्यतिथि में किया जा रहा है । यह आयोजन 16 दिसम्बर से 24 दिसम्बर तक किया जाएगा। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के भागवत आचार्य हैं पंडित कृष्णकांत शास्त्री ( कवर्धा वाले )प्रथम दिवस  कलश यात्रा  माताओं एवं बहनों द्वारा निकाली गयी भागवत भगवान के महिमा का वर्णन किया गया । जिसमें भागवताचार्य शास्त्री जी ने कहा कि भागवत  कथा मणि की माला है अन्य सब साधन कांच की माला है भागवत की कथा स्वर्ग में सत्यलोक में बैकुंठ में कैलाश पर्वत में प्राप्त नहीं होती । केवल मृत्यु लोक में ही प्राप्त होती है । इसलिए श्रीमद् भागवत कथा को ध्यान लगाकर सुनना चाहिए क्योंकि भगवान देवगन भी इस कथा श्रवण के लिए तरसते हैं और जहां-जहां कथा संपन्न होती है वह किसी न किसी रूप में कथा स्थल पर बैठकर श्रवण करते हैं  । शास्त्री जी ने बताया कि  श्रीमद्भागवत भगवान का प्रादुर्भाव क्रमशः भगवान नारायण ने ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी ने नारद को नारद ने व्यास जी को व्यास जी ने सुखदेव जी को सुखदेव जी ने राजा परीक्षित जी को भागवत की कथा श्रवण कराई । भागवत जी में 335 अध्याय 18000 श्लोक द्वादश स्कंध और भगवान के चरित्र का वर्णन है । जब चौसर में धर्मराज युधिष्ठिर मां द्रोपती को कौरवों के हाथों हार गया तब द्रौपदी मैया के का चीर हरण करने के लिए दुर्योधन ने दुशासन को आदेश दिया जब दुशासन भैया द्रोपती की कपड़ा खींचने लगा तब द्रोपती की पांचो पति सर झुका कर बैठ गए । इतने बलवान होने के बावजूद वे  कौरवों के सामने सर भी नहीं उठा पाए । साथ ही महाबली भीष्म पितामह गुरु द्रोण भी नतमस्तक बैठे रहे । पांच पति के रहते हुए भी जब कोई साथ नहीं आया तब द्रोपती ने वासुदेव श्री कृष्णा को पुकारा वासुदेव श्री कृष्ण ने अपने भक्त की पुकार सुनकर द्रोपती की रक्षा की । कथा का तात्पर्य यह है कि  सुख के सब साथी  होते हैं दुख और  विपत्ति में सिर्फ भगवान ही साथ देते हैं हमारे सत्कर्म ही साथ देता है द्रोपती ने भगवान श्री कृष्ण के हाथों में अपने साड़ी को फाड़ कर जो पट्टी बंधी थी वह आज द्रौपदी की लाज बचाने में काम आ गई। जीवन में सत्कर्म करते  चलिए लोगों की भला करिए कहीं ना कहीं  आपके द्वारा किए गए कार्य आपके सामने सुखद रूप में अवश्य आएगा ।
आचार्य जी ने जीवन उपयोगी एक और कथा बताया उन्होंने पत्नी और धर्म पत्नी के संबंध में एक व्याख्यान दिया l उन्होंने बताया की धर्मपत्नी वह है जो पति को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाए । उन्होंने बताया कि एक कुम्हार छोटे से मिट्टी का टुकड़ा लेकर चाक पर रखा था और चाक घूमाने लगा । पत्नी ने देखा और उनसे पूछा यह क्या बना रहे हो l कुम्हार ने कहा मैं इस मिट्टी से चिलम बनाऊंगा क्योंकि ठंड चल रही है चिलम की मांग बहुत ज्यादा है l  पत्नी ने कहा चिलम बनाकर क्या करोगे मात्र  ₹10 में  बेचोगे  4 महीने बाद ठंड खत्म हो जाएगा । गर्मी आएगी सुराही बनाओ वह ₹100 में बिकेगी खुद भी ठंड रहेगी और लोगों को भी ठंडा करेगी। कुम्हार  ने पत्नी के बात मानकर सुराही बनाने लगा। जब मिट्टी को  चाक में रखकर कुम्हार घूमाने लगा तो मिट्टी से आवाज आई अरे कुमार तुमने पत्नी की बात मानकर आज सुराही बना रहे हो पत्नी के विचार से तो तुम्हारा मन बदल गया । लेकिन मेरा तो जीवन ही बदल गया । अगर चिलम बनाते तो मैं स्वयं जलती और  पीने वाले को भी जलाती । लेकिन आज सुराही बनाकर तुमने बड़े धर्म के काम किया है मैं खुद तो ठंडा रहूंगी और लोगों को भी  पीने वालों को भी ठंडा रखूंगी ।
 श्रीमद् भागवत कथा हमें सत्कर्म की ओर ले जाती है भागवत कथा सिर्फ  सुने ही नहीं उसे मनन करें उसे अपने जीवन में उतारे तभी कथा का उद्देश्य सार्थक होगी ।

वीरेन्द्र भारद्वाज

चीफ़ एडिटर, भास्कर न्यूज़ 24

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