भास्कर न्यूज़ 24 /वीरेंद्र भारद्वाज/दल्लीराजहरा। खदान मजदूर संघ भिलाई संबंद्ध भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि  15-09-2026 को संघ का एक प्रतिनिधिमंडल नवनियुक्त मुख्य महाप्रबंधक श्री सिंग से सौजन्य भेंट किया और उनका लौह नगरी में पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
साथ ही उन्हें दल्ली यंत्रीकृत खदान में संचालित 1.2 मिलीयन टन पैलेट प्लांट से संबंधित विभिन्न विषयों पर ज्ञापन भी सौंपा।
और इस ज्ञापन की प्रतिलि सचिव, इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली,  ईमुख्य सतर्कता अधिकारी SAIL / केंद्रीय सतर्कता आयोग, नदिल्ली, उप मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय), रायपुर (छ.ग.महाप्रबंधक ( एजेंट) दल्ली यंत्रीकृत खदान आईओसी राजहरासौरभ लूनिया जिला महामंत्री भारतीय जनता पार्टी जिला बालोद को भी दिया है।

ज्ञापन में दल्ली यंत्रीकृत माइंस के अंदर स्थित 1.2 MTPA पैलेट प्लांट के संबंध में समस्त तथ्यों सहित शिकायत किया गया है जिसमें सेंट्रल लाइसेंस, BSP की EC/CTO/जमीन/पानी/बिजली/मटेरियल होने के बाद भी फैक्ट्री एक्ट बताकर श्रमिकों को केन्द्रीय वेतनमान से वंचित करना एवं लीज बाउंड्री कों अवैध रूप से बदलने की जांच की भी मांग किया है।
संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने आगे बताया कि कार्यलय उप मुख्य श्रमायुक्त (केन्द्रीय) से सूचना के अधिकार से जानकारी दी गई है कि जगन्नाथ स्टील प्लांट द्वारा 300 श्रमिकों का लेबर लायसेंस लिया गया था और जो 05-09-2026 तक वैध था
RTI जवाब पत्र क्र. No. RP-99(11)/2026-27-RTI, दिनांक 03.06.2026*
*2. Central Labour License जारी दिनांक 06.09.2023, वैधता 05.09.2026 तक, 300 श्रमिक*
*3. CTO No. 7453/TS/CECB/2023, दिनांक 27.12.2023*
*4.EC- Rajhara Hill Lease 719.60 Ha*.

संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद अंसारी ने आगे बताया कि दल्ली यंत्रीकृत खदान में बने पैलेट प्लांट में कार्यरत श्रमिकों के साथ वेतनमान को लेकर कंपनी के द्वारा भेदभाव की निती अपनाईं जा रही है जोकि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। क्योंकि निम्न तथ्यों से यह स्पष्ट होता है। पैलेट प्लांट माइनिंग लीज के अंदर ही स्थित है और यहां जानबूझकर श्रमिकों को फैक्ट्री एक्ट का वेतनमान दिया जा रहा है। क्योंकि जब यह पैलेट प्लांट का निर्माण हो रहा था तब बीएसपी प्रबंधन इसे माइनिंग लीज के अंदर बता रही थी और श्रमिकों का वेतन भी बीएसपी द्वारा नियुक्त अतिश्रम कल्याण अधिकारी द्वारा जांच करने के बाद दिया जाता था जिसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है मगर बीएसपी प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उस समय भी वहां कार्यरत श्रमिकों से 12-12 घंटे काम करवाया जाता था और वेतन पूरा नहीं दिया जाता था मगर बीएसपी प्रबंधन द्वारा ठेकेदार को
वेतन भुगतान के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता था जोकि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि जगन्नाथ स्टील प्लांट कंपनी द्वारा कार्यलय उप मुख्य श्रमायुक्त( केन्द्रीय) से 300 श्रमिकों का लेबर लाइसेंस भी लिया गया था जोकि 05-09-2026 तक वैध था इससे स्पष्ट होता है कि बीएसपी प्रबंधन और जगन्नाथ स्टील प्लांट के जिम्मेदार अधिकारियों को पहले से पता था कि पैलेट प्लांट माइनिंग लीज में ही है और इसलिए कार्यालय उप मुख्य श्रमायुक्त (केन्द्रीय) से 300 श्रमिकों का लेबर लाइसेंस भी लिया गया था और यह बात निम्नलिखित तथ्यों से भी स्पष्ट होता है कि पैलेट प्लांट माइनिंग लीज के अंदर ही है।

*1. सब कुछ BSP का है, पैसा सिर्फ ऑपरेटर ने लगाया है -*
– *BSP सब स्टेशन आदि का पैसा बनाने के लिए BSP ने दिया।*
– *EC BSP के नाम पर है।*
– *Labour License Central का है।*
– *Consent to Operate (CTO) BSP के नाम पर है।*
– *पानी BSP का, लैंड BSP की, मटेरियल BSP का है।*
– निवेश जो किया है वो *श्री जगन्नाथ स्टील प्लांट कंपनी ने किया है, यहाँ से जो पैलेट तैयार होगा वो BSP को बेचेंगे और उसी से उनका पैसा वापस होगा।* यह BOT/MDO मॉडल है, स्वतंत्र फैक्ट्री नहीं।

*2. पूरा सर्कल लीज बाउंड्री के अंदर है -*
– *मटेरियल लीज बाउंड्री के अंदर से आता है और पैलेट बनके फिर वापस लीज बाउंड्री के अंदर BSP को ही जाता है।*
– *BSP द्वारा इसकी मॉनिटरिंग किया जाता है कि कंपनी किसी और को पैलेट न बेच सके।*

*3. पहले सेंट्रल वेतन मिलता था -*
– *Labour का payment जब plant बन रहा था, उस time workers को Central Wages मिलता था और Labour का NOC BSP के Labour Officer के द्वारा दिया जाता था।*
– *उस time Free Power भी BSP द्वारा दिया जाता था।*

*4. सबसे बड़ा सवाल – लीज बाउंड्री किसके आदेश से Change किया गया?*
बिना किसी सक्षम आदेश, IBM की अनुमति और भारत सरकार की मंजूरी के लीज बाउंड्री को बदल दिया गया है। इसकी कोई प्रति सार्वजनिक नहीं की गई।

*कानूनी स्थिति -*
Mines Act 1952 की धारा 2(j) के अनुसार खदान के अंदर स्थित कोई भी बेनिफिएशन प्लांट, पैलेट प्लांट खदान का ही हिस्सा है। जब EC, CTO, जमीन सभी BSP के नाम पर है तो Appropriate Government केन्द्र ही है। इसलिए Central Minimum Wages लागू होगा, Factory Act का State Wages नहीं।

*मांग -*
1. लीज बाउंड्री बदलने के आदेश की प्रति तलब कर निरस्त किया जावे।
2. पैलेट प्लांट में कार्यरत श्रमिकों को 01.04.2026 से लागू Central Wages + VDA + EPF + ESIC + बोनस का भुगतान एवं अंतर की राशि दिलाई जावे।
3. इस पूरे प्रकरण की CVO-SAIL / CVC द्वारा सतर्कता जांच कराई जावे।
4. जांच तक किसी भी श्रमिक को नौकरी से न निकाला जावे।
ज्ञापन सौंपने में मुख्य रूप से संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद, उपाध्यक्ष महेंद्र साहू, कोषाध्यक्ष संतोष देवांगन, रजनीश जरयाल, उल्लास देवांगन, शेखर निर्मलकर,संजय यादव, जितेन्द्र मोहन माला, मनीष कुमार, कोमल साहू, विमल यादव , यशवंतकुमार,देवनारायण ,कमलेश कुमार,विनय कुमार, राहुल कुमार, देवेन्द्र कुमार, ललित जयसवाल, अजहरुद्दीन,सोनू ठगेल,डामेन्द कुमार, एवं अन्य सदस्यों की उपस्थिति थी।

 

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By वीरेन्द्र भारद्वाज

चीफ़ एडिटर, भास्कर न्यूज़ 24

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