भास्कर न्यूज़ 24/वीरेंद्र भारद्वाज/ दल्लीराजहरा। दल्ली यंत्रीकृत खदान के अंदर संचालित 1.2 मिलियन टन पैलेट प्लांट में कार्यरत ठेका श्रमिकों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर खदान मजदूर संघ भिलाई (भारतीय मजदूर संघ) ने मोर्चा खोल दिया है। संघ अध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने बताया कि 16 अक्टूबर को कांकेर सांसद भोजराज नाग के राजहरा प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उनसे भेंट कर ज्ञापन सौंपा। संघ ने बताया कि इससे पहले इसी मुद्दे पर श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन से भी मुलाकात की गई थी। मंत्री ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सचिव श्रम विभाग को जांच के निर्देश दिए थे, जिस पर सचिव ने श्रमायुक्त नवा रायपुर को उचित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

*संघ के आरोप – सब कुछ BSP का, वेतन फैक्ट्री एक्ट का*

मुश्ताक अहमद ने बताया कि पैलेट प्लांट से जुड़े सभी मुख्य दस्तावेज BSP के नाम पर हैं। EC – राजहरा हिल लीज 719.60 हेक्टेयर, CTO नंबर 7453/TS/CECB/2023 दिनांक 27.12.2023, जमीन, पानी, बिजली, मटेरियल सब BSP का है। इसके बावजूद श्रमिकों को केंद्रीय वेतनमान से वंचित कर फैक्ट्री एक्ट का वेतन दिया जा रहा है।

संघ ने RTI से मिले दस्तावेजों का हवाला दिया – कार्यालय उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) से जगन्नाथ स्टील प्लांट ने 300 श्रमिकों का सेंट्रल लेबर लाइसेंस लिया था, जो 06.09.2023 को जारी हुआ और 05.09.2026 तक वैध था। पत्र क्रमांक RP-99(11)/2026-27-RTI दिनांक 03.06.2026। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन को पता था कि प्लांट माइनिंग लीज के अंदर है।

संघ का कहना है कि प्लांट निर्माण के दौरान सभी श्रमिकों को केंद्रीय वेतनमान दिया जाता था और वेतन का अनापत्ति प्रमाण पत्र BSP के पर्सनल विभाग द्वारा दिया जाता था। उस समय मुफ्त बिजली भी दी जाती थी। बाद में ठेकेदारों द्वारा 12-12 घंटे काम कराकर पूरा वेतन नहीं दिया गया, फिर भी NOC जारी कर दिया गया।

संघ ने सबसे बड़ा सवाल लीज बाउंड्री बदलने पर उठाया। आरोप है कि बिना IBM और भारत सरकार की मंजूरी के लीज बाउंड्री बदल दी गई, जिसकी प्रति सार्वजनिक नहीं की गई। Mines Act 1952 की धारा 2(j) के अनुसार लीज के अंदर स्थित कोई भी बेनिफिएशन/पैलेट प्लांट खदान का ही हिस्सा है, इसलिए Appropriate Government केंद्र है और Central Minimum Wages लागू होना चाहिए।

*संघ की 4 प्रमुख मांगें -*

1. लीज बाउंड्री बदलने के आदेश की प्रति तलब कर निरस्त की जाए।
2. 01.04.2026 से Central Wages + VDA + EPF + ESIC + बोनस का भुगतान व अंतर राशि दिलाई जाए।
3. पूरे प्रकरण की CVO-SAIL / CVC से सतर्कता जांच हो।
4. जांच पूरी होने तक किसी भी श्रमिक को नौकरी से न निकाला जाए।

संघ ने आरोप लगाया कि कंपनी के सुपरवाइजर द्वारा स्थानीय आदिवासी श्रमिकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, बाहर से लाए गए लोगों को ज्यादा वेतन-सुविधा दी जा रही है और ड्राइवर भर्ती में भी स्थानीय लोगों की अनदेखी हो रही है, जबकि SDM के समक्ष बैठक में स्थानीय भर्ती का आश्वासन दिया गया था।

ज्ञापन सौंपने के दौरान मुश्ताक अहमद के साथ नगरपालिका अध्यक्ष तोरणलाल साहू, महेंद्र सिंग, सुरेंद्र बेहरा, तरुण टंडन, अमित तिवारी, विजय कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

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By वीरेन्द्र भारद्वाज

चीफ़ एडिटर, भास्कर न्यूज़ 24

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