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सपनों का सौदागर’ निकला यह बजट; मध्यम वर्ग और गरीबों के साथ फिर हुआ विश्वासघात- कोसमा

भास्कर न्यूज़ 24/ वीरेंद्र भारद्वाज/दल्लीराजहरा।  केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी को पेश किया गया बजट आंकड़ों का मायाजाल और जुमलों की पोटली मात्र है। हमारी पार्टी इसे सिरे से खारिज करती है क्योंकि इसमें न तो बेरोजगारी का समाधान है और न ही आसमान छूती महंगाई से राहत देने का कोई ठोस रोडमैप।
इस बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी दल्ली राजहरा  सरकार को घेरा और कहा कि
युवाओं के लिए ‘रोजगार’ शब्द का अभाव
सरकार ने एक बार फिर देश के करोड़ों शिक्षित बेरोजगार युवाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया है। बजट में सरकारी रिक्तियों को भरने या नई नौकरियों के सृजन के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं दिया गया। स्किल इंडिया के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
किसान और कृषि क्षेत्र की अनदेखी
एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बजाय, सरकार ने कृषि बजट में कटौती कर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़का है। ‘आय दोगुनी’ करने का वादा अब एक कड़वा मजाक बन चुका है।
मध्यम वर्ग को मिला ‘अंगूठा’
आयकर (Income Tax) की स्लैब में मामूली बदलाव के नाम पर मध्यम वर्ग को बहलाने की कोशिश की गई है। हकीकत यह है कि अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) और महंगाई ने पहले ही आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट में भारी गिरावट
एक ओर सरकार विकसित भारत का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों के बजट आवंटन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई है। यह बजट केवल चुनिंदा बड़े पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुँचाने के लिए बनाया गया है।
यह बजट “मित्र काल “का बजट लगता है अमृत काल का बजट क़तई नहीं।

वीरेन्द्र भारद्वाज

चीफ़ एडिटर, भास्कर न्यूज़ 24

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